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जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वजन उठाते हैं तो संà¤à¤² जाà¤à¤‚, आपको इस बीमारी का खतरा है
डाइबिटीज, थायरॉइड के मरीज और 40 पार की महिलाà¤à¤‚ इससे खासतौर पर सावधान रहें.
आपकी सेहत à¤à¤•दम ठीकठाक है, दौड़ने-à¤à¤¾à¤—ने में कोई परेशानी नहीं लेकिन à¤à¤•ाà¤à¤• किसी दिन शरà¥à¤Ÿ के बटन बंद करने में पसीना छूट जाठया फिर कंघी करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल काम लगने लगे तो दरà¥à¤¦ की दवा खाने की बजाठतà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास पहà¥à¤‚चे- ये तकलीफ फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° हो सकती है.
कà¥à¤¯à¤¾ है ये बीमारी और कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है
फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° को चिकितà¥à¤¸à¤•ीय à¤à¤¾à¤·à¤¾ में à¤à¤¡à¤¹à¥‡à¤¸à¤¿à¤µ कैपà¥à¤¸à¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¥€ कहा जाता है. ये à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ है जिसमें कंधे में दरà¥à¤¦ और कड़ापन आ जाता है. हलà¥à¤•ी तकलीफ से शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ होती है लेकिन कà¥à¤› ही दिनों के à¤à¥€à¤¤à¤° दरà¥à¤¦ इतना बढ़ जाता है कि मरीज रोजमरà¥à¤°à¤¾ के काम à¤à¥€ ठीक से नहीं कर पाता. इसके लकà¥à¤·à¤£ समय के साथ, जैसे कà¥à¤› महीनों या साल में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खराब होते चले जाते हैं. 40 पार के लोगों और डायबिटीज के मरीजों में इसकी आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहती है. कई बार कंधे के à¤à¤Ÿà¤•े वाले मूवमेंट या बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ से à¤à¥€ ये समसà¥à¤¯à¤¾ हो जाती है. à¤à¤•ाà¤à¤• जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वजन उठाने से à¤à¥€ फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° हो सकता है.
कंधा तीन हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ हà¥à¤¯à¥‚मरस, सà¥à¤•ैपà¥à¤¯à¥à¤²à¤¾ और कà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤•ल से मिलकर बना है जो साथ में à¤à¤• बॉल और सॉकेट की तरह काम करते हैं. इन हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के चारों ओर टिशू होते हैं जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सीधी चोट से बचाने और तीनों को साथ रखते हà¥à¤ मूवमेंट का काम करते हैं. इन टिशू यानी ऊतकों को कैपà¥à¤¸à¥‚ल कहते हैं. फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ कंधों की समसà¥à¤¯à¤¾ तब आती है, जब हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के चारों ओर ऊतकों की खोल कड़ी हो जाती है और कंधे के जोड़ को हिलने-डà¥à¤²à¤¨à¥‡ से रोकती है.
फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚
आमतौर पर यह अवसà¥à¤¥à¤¾ लंबे समय में धीरे-धीरे बढ़ती है. इसके तीन चरण होते हैं तथा हर चरण कà¥à¤› महीने से लेकर सालà¤à¤° तक चल सकता है.
पहली अवसà¥à¤¥à¤¾ है फà¥à¤°à¥€à¤œà¤¿à¤‚ग सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ. इसमें कंधे की कोई à¤à¥€ गतिविधि, इसका हिलना दरà¥à¤¦ पैदा करता है. इस वजह से धीरे-धीरे मरीज अपने कंधे को कम से कम इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाने लगता है. ये अवसà¥à¤¥à¤¾ 6 से 9 महीने तक चलती है.
दूसरा चरण है फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ. इसमें दरà¥à¤¦ तो हालांकि थोड़ा कम होने लगता है लेकिन कंधे का कड़ापन बढ़ जाता है और इसे काम में लाना और कठिन होता चला जाता है. ये दौर 4 से 12 महीनों के बीच खिंच सकता है.
तीसरा à¤à¤µà¤‚ अंतिम चरण है थॉइंग सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ. इसमें कंधे का दरà¥à¤¦ और सखà¥à¤¤à¥€ दोनों ही कà¥à¤°à¤®à¤¶: कम होते चले जाते हैं. कà¥à¤› लोगों का दरà¥à¤¦ रात में बढ़ जाता है और सोना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है. ये अवसà¥à¤¥à¤¾ 6 महीने से 2 साल या कई-कई बार तीन साल à¤à¥€ खिंच सकती है.
कà¥à¤¯à¤¾ है बीमारी की वजह
अब तक ये पता नहीं चल सका है कि आखिर फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होता है, हालांकि कà¥à¤› लोगों में इसकी आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है. महिलाओं को ये समसà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की अपेकà¥à¤·à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है. इसकी वजह हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी और 50 के आसपास पीरियडà¥à¤¸ का बंद होना है. कंधा फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ तब होता है, जब मरीज किसी वजह से अपने कंधे का कम इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करता है. इन कारणों में कंधे में दरà¥à¤¦, चोट, हाथों की सरà¥à¤œà¤°à¥€ या सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• शामिल हैं. डायबिटीज के मरीज à¤à¥€ इस शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में आते हैं. कंधों की कोई à¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ कंधे की वजह बन सकती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मरीज इनका पूरा इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं करता है. 40 से 70 की उमà¥à¤° में à¤à¥€ यह समसà¥à¤¯à¤¾ आम है. इसके अलावा थायरॉइड के मरीजों (हाइपो और हाइपर थायरॉइड), दिल की बीमारियों के मरीज, टीबी के मरीजों में इसका खतरा अधिक होता है.
कैसे होता है इलाज
अमूमन शारीरिक जांच और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर इसकी पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हो जाती है लेकिन à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¥‡ व à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ à¤à¥€ करते हैं ताकि ये पता लगाया जा सके कि कोई और जटिलता तो नहीं है. इसी आधार पर इलाज शà¥à¤°à¥‚ होता है जिसमें दवाओं के साथ फिजियोथैरेपी à¤à¥€ दी जाती है. घर पर ही कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® à¤à¥€ किठजा सकते हैं जो काफी मदद करते हैं. इलाज शà¥à¤°à¥‚ होने पर फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ कंधों को ठीक होने में लगà¤à¤— सालà¤à¤° का समय लग सकता है. हाथों की सरà¥à¤œà¤°à¥€ या सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤• के बाद अकà¥à¤¸à¤° मरीज अपने कंधों के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचते हैं. लंबे समय तक इनका काम में न आना या बहà¥à¤¤ कम इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² ऊतकों में सखà¥à¤¤à¥€ ला देता है. कंधों का धीरे-धीरे वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® और इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लगातार काम में लाना कà¥à¤› हद तक समसà¥à¤¯à¤¾ से बचा सकता है.
à¤à¤¸à¥‡ बचें इस दरà¥à¤¦ से
आमतौर पर à¤à¤• ही कंधे को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाली इस समसà¥à¤¯à¤¾ से बचाव आसान है. सबसे पहले तो जांचें कि कà¥à¤¯à¤¾ आप à¤à¥€ फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ के शिकार तो नहीं. अपने हाथों को बारी-बारी से पीछे पीठकी ओर ले जाà¤à¤‚ और घà¥à¤®à¤¾à¤à¤‚. अगर दोनों ही साथ सहजता से घूम पाते हैं तो आपको ये समसà¥à¤¯à¤¾ नहीं लेकिन अगर कोई à¤à¤• या दोनों ही हाथ à¤à¤¸à¤¾ न कर पाà¤à¤‚ या मूवमेंट में बहà¥à¤¤ परेशानी होती लगे तो आप फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° के मरीज हो सकते हैं. डॉकà¥à¤Ÿà¤° से इसकी जांच कराà¤à¤‚. अगर आपको ये तकलीफ नहीं है तो पहले ही इससे बचाव के उपाय कर लें. दिन में तीन से चार बार कंधों को पूरे सरà¥à¤•ल में घà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥‡ या इसी तरह के योग करने से समसà¥à¤¯à¤¾ से बचा जा सकता है.
फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° में जब दरà¥à¤¦ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो तो हाथों को सिर के बराबर ऊंचाई पर रख कर सोà¤à¤‚. हाथों के नीचे à¤à¤•-दो कà¥à¤¶à¤¨ रखकर सोने से आराम मिलता है.
फà¥à¤°à¥€à¤œà¤¿à¤‚ग पीरियड में किसी à¤à¥€ तरह का वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से बचें, वरना समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गंà¤à¥€à¤° हो सकती है.
डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर हीटिंग पैड का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकते हैं ताकि दरà¥à¤¦ में राहत मिले.
काम करते हà¥à¤ कंधों को सहारा देने के लिठशोलà¥à¤¡à¤° सà¥à¤²à¤¿à¤‚ग लगा सकते हैं, इससे मूवमेंट अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत आसानी से होगा.
फà¥à¤°à¥‹à¤œà¤¨ शोलà¥à¤¡à¤° की समसà¥à¤¯à¤¾ न हो, इसके लिठपहले से ही हाथों का वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करते रहें. महिलाà¤à¤‚, चालीस पार के लोग और थायरॉइड के मरीज खास सावधानी रखें.
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